7 नवंबर 2026 - 19:12
ट्रंप के फैसले से इस्राईल के सैन्य और सुरक्षा हलकों में मची खलबली

ट्रंप के इस फैसले से इस्राईल के युद्ध मंत्रालय, वित्त मंत्रालय, सेना और सुरक्षा एजेंसियां हैरान रह गईं। इस्राईल के दो अधिकारियों के मुताबिक, फैसले की घोषणा से पहले उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई थी।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक फैसले ने इस्राईल के सैन्य और सुरक्षा अधिकारियों को हैरान कर दिया है। ट्रंप ने घोषणा की है कि अमेरिका इस्राईल को हर साल मिलने वाली 3.8 अरब डॉलर की सुरक्षा सहायता बंद करने पर सहमत हो गया है।

अल-मयादीन की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि उन्होंने इस्राईल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ अमेरिकी सुरक्षा सहायता बंद करने पर सहमति बनाई है। ट्रंप का कहना है कि इस्राईल को अब इस आर्थिक सहायता की जरूरत नहीं है, हालांकि वह अमेरिका से हथियार खरीदना जारी रख सकता है।

यह घोषणा ऐसे समय में हुई है, जब डेमोक्रेटिक पार्टी के कई नेताओं ने अमेरिकी करदाताओं का पैसा इस्राईल पर खर्च किए जाने की आलोचना की है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप ने यह कदम अपने राजनीतिक विरोधियों के हाथ से एक बड़ा चुनावी मुद्दा छीनने के लिए उठाया है।

हालांकि, इस फैसले को लागू करने की तारीख और इसके तरीके को लेकर अभी भी कई सवाल बने हुए हैं। ट्रंप ने कहा है कि अमेरिकी सहायता 2026 के अंत तक बंद कर दी जाएगी, जबकि पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में हुआ मौजूदा समझौता 2028 के अंत तक जारी रहना था।

रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप के इस फैसले से इस्राईल के युद्ध मंत्रालय, वित्त मंत्रालय, सेना और सुरक्षा एजेंसियां हैरान रह गईं। इस्राईल के दो अधिकारियों के मुताबिक, फैसले की घोषणा से पहले उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई थी।

गौरतलब है कि करीब दो सप्ताह पहले इस्राईल का एक प्रतिनिधिमंडल भविष्य में हथियारों की खरीद से जुड़े मामलों पर चर्चा करने के लिए अमेरिका गया था। इस दौरान टैंकों के पुर्जे, गोला-बारूद, संचार उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक सामान, मरम्मत और सुरक्षा प्रणालियों की खरीद पर बातचीत हुई थी।

इस्राईल के चैनल-12 की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त मंत्रालय भी ट्रंप के इस फैसले से अनजान था। मंत्रालय ने 2027 और 2028 के बजट इस उम्मीद के साथ तैयार किए थे कि मौजूदा समझौते के तहत अमेरिकी सहायता जारी रहेगी।

मंत्रालय के सूत्रों ने चेतावनी दी है कि अगर पहले से तय हथियारों की खरीद की जिम्मेदारियों के बीच अमेरिकी सहायता बंद कर दी गई, तो इस्राईली सरकार को पैसों का दूसरा इंतजाम करना पड़ेगा। इससे सरकार पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है।

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